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मछलीपालन कर जिले के किसान बनेंगे आत्मनिर्भर जिला प्रशासन और एबीस कंपनी के मध्य हुआ एमओयू

 


जिले के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आज जिला प्रशासन एवं राजनांदगांव स्थित एबीस कंपनी के बीच मछलीपालन को प्रोत्साहित करने हेतु द्विपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर कंपनी के प्रतिनिधियों ने किसानों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी और मछलियों की खरीदी की जिम्मेदारी लेने का आश्वासन दिया। अनुमान के अनुसार धान की तुलना में मछलीपालन से किसानों की आमदनी कहीं अधिक होती है।कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गंगरेल बांध एवं आसपास के गांवों के मछलीपालकों को मछलीपालन की उन्नत विधियों से जोड़ते हुए विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि धमतरी जिला प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और यहां के किसान मेहनत से खरीफ एवं रबी मौसम में धान उत्पादन करते हैं, जिसके कारण इसे"धनहा धमतरी"कहा जाता है।

कलेक्टर श्री मिश्रा ने कृषि एवं संबद्ध विभागों की समीक्षा बैठक में कहा कि जिले में फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर कम जल मांग वाली फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिले की भौगोलिक स्थिति मक्का उत्पादन के लिए अनुकूल है। इसी को ध्यान में रखते हुए नगरी विकासखंड में 1000 हेक्टेयर, मगरलोड में 500 हेक्टेयर तथा धमतरी में 500 हेक्टेयर रकबे में मक्का फसल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बैठक में पीएमएफएमई योजनांतर्गत दाल मिल, तेल मिल, आटा चक्की सहित अन्य यंत्रों के लिए प्रकरण तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, ताकि स्थानीय उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। प्रत्येक विकासखंड में 20-20 प्रकरण तैयार करने को कहा गया है। इसके साथ ही दलहन-तिलहन, लघु धान्य फसलें, ऑयल पाम एवं मखाना जैसी नवाचार फसलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।कलेक्टर ने पीवीटीजी कृषकों को बांस रोपण के लिए प्रेरित करने तथा एग्रीस्टेक, किसान पोर्टल एवं कैरी फॉरवर्ड से संबंधित समस्याओं का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने पर बल दिया।

इस प्रकार जिला प्रशासन के प्रयासों से जिले के किसान मछलीपालन, मक्का उत्पादन एवं नवाचार खेती के माध्यम से आत्मनिर्भर बनेंगे और आर्थिक उन्नति की दिशा में एक नई पहचान स्थापित करेंगे।

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