सड़क सुरक्षा माह में एक तरफ सुरक्षा का पाठ तो दूसरी तरफ हादसों की दहशत
यातायात विभाग की सीख का नहीं हो पा रहा ठीकठाक असर
उठे सवाल ?
गोल्डी खान / धमतरी शहर के साथ जिले की सड़को में सड़क हादसों की रफ्तार बनी हुई है इसी दौरान सड़क सुरक्षा माह भी चल ही रहा है जिसमें यातायात संबंधी विभिन्न कार्यक्रम भी किए जा रहे है पुलिस की टीमें शहर के साथ ग्रामीण इलाको में भी पहुंचकर लोगों को यातयात नियमों की जानकारी दे ही रही है फिर कार्रवाई की बात करे तो पुलिस की कार्रवाई भी रुक नहीं रही है बावजूद हादसे है कि जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे है जिसे लेकर लोगो का कहना है कि यातायात विभाग की सीख का शायद असर लोगों के जहन में नहीं हो रहा है हालांकि आपको बता दे कि सड़क सुरक्षा के अलावा भी यातयात पुलिस स्कूलों के अलावा अन्य जगहों में भी समय समय पर जाकर यातयात संबंधी बहुत सी जानकारी स्कूलों बच्चों शिक्षकों गाड़ी के चालकों समेत सभी को देती है और खासबात यह सिलसिला आज का नहीं है काफी समय से यह प्रयास यातायात पुलिस करती ही रहती है और उसकी कार्रवाई भी लगातार जारी ही रहती मगर विडंबना है कि इसके बाद भी इसका जमीनी स्तर पर कोई फायदा नजर नहीं आता ऐसा लोगो का मानना है लोग यह भी बताते है कि शायद ही ऐसा कोई दिन गुजरता होगा जब शहर के साथ जिले की सड़को में हादसे नहीं होते है यहां तो यह रोज की ही बात हो गई है बतौर उदाहरण कल ही आमदी में 35 बच्चों से भरी स्कूली बस और मिट्टी से भरी हाईवा में टक्कर हो गई थी गनीमत रही कि हादसे में बच्चों को कुछ नहीं हुआ अन्यथा बड़े हादसे से इनकार भी नहीं किया जा सकता था वहीं आज मगरलोड के भरदा मार्ग में भी एक कार और दो बाइक में जोरदार टक्कर हुई है जिसमें भी एक व्यक्ति की मौत हुई है तो दो घायल हुए है चूंकि शहर समेत जिले से ऐसी खबरें रोज ही आती है तो लोगो का यातायात व्यवस्था पर सवाल उठाना भी वाजिब है फिर लोग यह भी कह रहे कि शहर समेत जिले में तो रोज ही हादसे हो रहे लोगों की जान भी जा रही है तो कम से कम इस यातयात सड़क सुरक्षा माह के दौरान तो ऐसा नहीं होना चाहिए यातायात विभाग जिसकी रोकथाम को लेकर ही इतने उपाय कर रहा उसी दौरान यदि हादसे होते रहे तो फिर सुरक्षा माह क्या ही मायने निकलेगा जिसे सुरक्षा माह कैसे ? बोला जायेगा जब इस माह के दौरान ही लोगो की जान जाती रहे और हादसे होते रहे

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